मैं अब ‘हिन्दुस्तानी’ नहीं ‘हिन्दू स्थानी’ हूँ…

//मैं अब ‘हिन्दुस्तानी’ नहीं ‘हिन्दू स्थानी’ हूँ…

मैं अब ‘हिन्दुस्तानी’ नहीं ‘हिन्दू स्थानी’ हूँ…

written on 15 April 2018

हाँ मैं शर्मिंदा हूँ क्योंकि
मैं अब ‘हिन्दुस्तानी’ नहीं ‘हिन्दू स्थानी’ हूँ।
अपनी पहचान को बदलते देखना जो कि आप पर थोपी जा रही हो हमेशा पीड़ादायक ही होती है। कोई अपने अस्तित्व का मिटना सहज स्वीकार नहीं कर सकता, मैं भी नहीं कर पा रहा।

‘हिन्दुस्तान’ के विश्व गुरु होने की परिकल्पना में कितनी सच्चाई है यह मुझे नहीं पता लेकिन मैंने इस बात के कारण खुद को सदैव गौरवान्वित महसूस किया है कि मेरे देश ने शांति, सौहार्द्य, सहनशीलता, परस्पर सहयोग सामंजस्य, विश्व बन्धुत्व, विविधता में एकता, एवं लोकतान्त्रिक मूल्यों का पाठ पूरे विश्व को पढ़ाया है। इस बात का अहसास मेरे अस्तित्व से जुड़े गर्व और व्यक्तिगत मान का विषय रहा है। लेकिन अब इसी में बुनियादी परिवर्तन होता साफ़ दिख रहा है, यह परिवर्तन जितना स्पष्ट है उतना ही तकलीफदेह है।

ऐसा नहीं है कि आजादी के बाद इससे पहले इस देश में साप्रदायिक दंगे नहीं हुए या बलात्कार की घटनाये नहीं हुई, 1984 के दंगे हों या 2002 के दंगे या फिर कोई और दंगा सभी अपने आप में विनाशकारी थे, इसी तरह इससे पहले हुई बलात्कार की तमाम घटनाएँ शर्मनाक थी लेकिन पिछले कुछ समय से कुछ ऐसा हो रहा है जो बिल्कुल ही नया है, विभत्स्कारी है, इस देश की मिट्टी, चरित्र एवं संस्कृति के बिल्कुल उलट है। और यह जो हो रहा है वह इस महान देश की उस महानता को ही नष्ट कर रहा है जिसके कारण एक आम हिदुस्तानी के तौर पर मैंने खुद पर अब तक गर्व किया है। यह होना इस देश के लोगों के सोच, स्वभाव को खतरनाक तरीके से बदल रहा है।

राजस्थान में अपना व्यभिचार छुपाने के लिए शम्भुलाल रैगर ने जिस तरह एक निर्दोष मुसलमान को वीडियो बनाते हुए कुल्हाड़ी से काट कर जिन्दा जला दिया हो सकता है इस तरह की घटनाएँ पहले भी हुई हो, हो सकता है कभी इसी तरह का अत्याचार किसी अन्य धर्मावलम्बी ने किसी हिन्दू के साथ भी किया हो लेकिन इससे पहले ऐसा इस देश में कभी नहीं हुआ कि इस तरह का जघन्य अपराध करने वाले व्यक्ति के पक्ष में तिरंगे झंडे के साथ जुलूस निकला हो और उस अपराधी के लिए चंदा जमा किया गया हो और उसे नायक के रूप में पेश किया गया हो। मेरी जानकारी में आज तक इस देश में ऐसा कभी नहीं हुआ क्योंकि इस देश की मिट्टी ने कभी भी इस तरह के अपराध को स्वीकार नहीं किया, ऐसे अपराध जब भी हुए समाज के हर वर्ग से सिर्फ विरोध की ही आवाज सुनाई दी। तो जो लोग शम्भुलाल रैगर जैसे कलंकित व्यक्ति को नायक बना रहे थे, समर्थन में सोशल मिडिया पर मुहिम चला रहे थे उनका इस हद तक नीचता दिखाना इस देश के स्वभाव में हो रहे खतरनाक परिवर्तन की ओर स्पष्ट इशारा कर रही है जिससे मानवता में विश्वास रखने वाला इस देश का हर नागरिक स्वाभाविक रूप से व्यथित और चिंतित होगा।

जम्मू के कठुआ में आठ साल की मासूम बच्ची आसिफा के साथ जिस भयानक तरीके से दरिंदगी हुई उसने निर्भया कांड की तरह इस देश के लोगों को आक्रोशित कर रखा है लेकिन जो निर्भया कांड के समय नहीं हुआ और जो मेरी समझ से इस देश में इससे पहले कभी नहीं हुआ वह था उस भयानक गैंगरेप में शामिल दरिंदों के पक्ष में निकाली गई रैली, सरकार के मंत्री का उसमें शामिल होना और कानून के रक्षक वकीलों द्वारा आन्दोलन करना। और इस समर्थन की रैलियों में भी हिंदुस्तान के झंडे थे, भारत माता की जय और जय श्री राम के नारे थे। यदि इस हद तक इस देश के लोगों और राजनीतिक पार्टियों का विवेक दूषित हो गया है तो फिर निश्चित रूप से हम एक अंधकार की तरफ बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं, निश्चित रूप से हम उस दुर्भाग्य काल के साक्षी हैं जिसमें इस देश की मूल आत्मा ही नष्ट हो रही है। इस महान भूमि के चरित्र के अनुरूप आपसी प्रेम, भाईचारे वाले गंगा जमुनी तहजीब वाले समाज को बहुसंख्यवाद की आग में जलाया जा रहा है। इस देश के समावेशी सोच वाले गैर साम्प्रदायिक समाज के कारण ही एक साथ आजाद होने के 70 साल बाद आज हम सांप्रदायिक कट्टरता की कोख से जन्मे पाकिस्तान से हर क्षेत्र में न सिर्फ आगे हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिष्ठित भी हैं। ‘हिंदुस्तान’ का सम्पूर्ण गौरव ‘हिन्दू पाकिस्तान’ या ‘हिन्दू स्थान’ बनाने की विनाशकारी मुहिम में खत्म हो रहा है।

तमाम निराशाजनक घटनाओं के बावजूद इससे पहले यह पीड़ा मैंने कभी महसूस नहीं की, अपने अस्तित्व को इस हद तक कलंकित होते मैंने कभी नहीं देखा। मेरा देश, मेरे देश की महानता ही तो मेरा आन है मेरा मान है, पर निरंतर सत्ता के लोभ में जिस तरह संकुचित तथाकथित राष्ट्रवाद और साम्प्रदायिकता का जहर समाज में घोला जा रहा है वह अंततः इस देश को ही नष्ट कर देगा। यदि हम इसी तरह यह होने देते रहे तो आने वाली पीढ़ी हमें सच में कभी माफ़ नहीं करेगी, जो मूक दर्शक बने रह गये तो निष्पक्ष इतिहास की किताबों में हम भी अपराधी की तरह कटघरे में खड़े होंगे।
हम सभी को कुछ तो सोचना होगा कुछ तो करना होगा, इस अनर्थ को रोकना होगा क्योंकि वाकई
मेरा देश बदल रहा है
मुझे शर्मिंदा कर रहा है।

By |2019-01-10T12:02:18+00:00January 10th, 2019|Messages|0 Comments

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